

प्रदेश स्तरीय बैठक महरा समाज का रायपुर में सम्पन्न


छत्तीसगढ़ / 1949 के 1950 के संविधान बनने के बाद के रिकॉर्ड में जब छत्तीसगढ़ के मूल निवासी महरा समाज अनुसूचित जनजाति में था जिनके ज्यादा जनसंख्या बस्तर में है जगदलपुर के नाम भी जगदु महरा के नाम से है तो ऐसे क्यों इनके समाज के जाति रिकॉर्ड को छेड़छाड़ कर उन्हें फिर पिछड़ा वर्ग ओबीसी में शामिल कर दिया गया बड़ा प्रश्नचिन्ह जो लगातार हमारे आई सी न्यूज प्रिंट मीडिया रायगढ़ माटी ये जानने की प्रयास कर रही है जो कि महरा समाज के कुछ वर्ग लागातार अनुसूचित जाति में शामिल होने की मांग कर रही है अनुसूचित जाति महार के साथ महरा नाम को पर्याय वाची शब्द बताकर जबकि शुरू से ही महरा और महार अलग अलग ही जाति है महरा समाज के प्रदेश अध्यक्ष ईश्वर सक्सेना का साफ तौर पर कहना है हमारे कुछ वर्ग जाति नाम में फर्जी फेरबदल कर फर्जी अनुसूचित जाति के सार्टिफिकेट से नौकरी कर रहे हैं जिसके डर से ही ये ऐसा कर रहे हैं जबकि हमे अपने मूल निवासी अनुसूचित जनजाति अधिकार के लिए ही मांग को हम आगे बढ़ा रहे हैं जिसके लिए हाल में ही प्रदेश स्तरीय बैठक महरा समाज के प्रमुख अधिकारी एवं सदस्यों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ है देखना ये होगा कि इन्हें इनके मूल अधिकार महरा समाज का कब मिलेगा और जो फर्जी सर्टिफिकेट के बदौलत हजारों की संख्या में अनुसूचित जाति कोटे से नोकरी कर अनुसूचित जाति वर्गो के हक मार रहे हैं ये सच्चाई के ऊपर जांच के साथ कार्यवाही कब होगी ।


