
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा की पहल
महिला सशक्तिकरण के लिए वैज्ञानिक सोच आवश्यक – आशा मिश्रा
पिथौरा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस अवसर पर छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा द्वारा वैज्ञानिक सोच के प्रचार प्रचार में महिलाओं की भूमिका विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया । उक्त वेबीनार राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षाविद डॉ फरहाना अली कोरबा की अध्यक्षता में संपन्न हुई ।महिलाएं किसी से किसी भी बात में कम नहीं है । उन्हें भी विकास के पूरे अवसर मिलने चाहिए इसी बात को दृष्टिगत रखते हुए यह विशेष वेबिनार आयोजित की गई थी ।
वेबिनार के मुख्य वक्ताओं में आशा मिश्रा ( महासचिव ए आई पी एस एन भोपाल ) डॉ प्रज्ज्वल शास्त्री (खगोल भौतिकविद बेंगलुरु)
डॉ चित्रा सिंह (सुविख्यात विज्ञान प्रचारक हरियाणा) डॉअंबिका टंडन ( एच ओ डी प्लांट फिजियोग्राफी आई जी के वी वी रायपुर ) निधि सिंह (शिक्षाविद , संयुक्त सचिव विज्ञान सभा) डॉ स्नेहलता हुमने (चिकित्सा विशेषज्ञ राजिम) डॉ श्रेणी दिवाकर (रसायनज्ञ सी एस ई बी कोरबा )
अंजू मेश्राम ( साइंस कम्युनिकेटर विज्ञान सभा) डॉ वंदना सिंह( शिक्षाविद दुर्ग) स्वाति टंडन (शिक्षाविद कुरूद धमतरी) रेखा गोंडाने (साइंस एक्टिविटिस्ट रायपुर ) श्रद्धा पवन सिंह (व्याख्याता कांकेर ) मोनिशा मराई (विज्ञान सभा कांकेर इकाई ) रुखसार खातून( विज्ञान संचारक सहायक प्राध्यापक भारत इंस्टीट्यूट आफ नर्सिंग कॉलेज कोरबा)शामिल थी।
प्रथम वक्ता के रूप में विषयांतर्गत अपनी बात रखते हुए आशा मिश्रा ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए वैज्ञानिक सोच आवश्यक है। इससे ही भारत विकसित राष्ट्र में बदल सकेगा।
अंजू मेश्राम ने अपने उद्बोधन में कहा कि किसी समाज या देश की प्रगति का पैमाना महिलाओं की तरक्की पर निर्भर करता है। महिलाएं जितनी तरक्की करेगी उतना ही देश समृद्ध होगा। स्त्री – पुरुष दोनों ही मनुष्य है इसमें दोयम दर्जे जैसी बात नही होनी चाहिए। समानतायुक्त समाज का निर्माण कर ही हम हमारे देश को महान बना सकते है।
डॉ स्नेहलता हुमने ने भी लिंग भेद पर कटाक्ष करते हुए कहा कि महिलाएं दुनिया की आधी आबादी का हिस्सा है।वे किसी भी मामले में पुरुषों से कम नहीं है ।समाज की प्रगति में जितना बड़ा योगदान पुरुषों का है उतना ही महिलाओं का भी।इसलिए पूर्ण लैंगिक समानता को ध्यान में रखते हुए महिलाओं को समान अवसर दें। लड़का व लड़की पर आधारित छोटी – छोटी कविताओं में भी लैंगिक भेद को देखा जा सकता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण महिलाओं के अंदर लाने में छोटी इकाई के रूप में परिवार की सबसे बड़ी भूमिका होती है।
खगोल भौतिकविद डॉ प्रज्ज्वल शास्त्री ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में महिलाएं धरती से लेकर आकाश तक हर फील्ड में पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं लेकिन विडंबना है कि आज भी उच्च शिक्षा से लेकर शोध संस्थानों के कार्य क्षेत्र तक उनके योगदानों को उतना महत्व नहीं मिलता जितना महत्व पुरुषों के योगदानों को दिया जाता है।
छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा की संयुक्त सचिव निधि सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि वैज्ञानिक जगत में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाली महिलाओं की सफलता की कहानी जन – जन तक पहुंचानी होगी।अन्य आमंत्रित अतिथियों में डॉ चित्रा सिंह, डॉ अंबिका टंडन, डॉ श्रेणी दिवाकर, डॉ वंदना सिंह ,स्वाति टंडन,रेखा गोंडाने,श्रद्धा पवन सेन,मोनिशा मराई व रुखसार खातून ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन अनामिका चक्रवर्ती (शिक्षाविद संयोजक छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा सरगुजा) ने किया तथा वेबीनार में जुड़े सभी लोगों का आभार छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के राज्य सचिव डॉ वाय के सोना ने माना।
उक्त जानकारी छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के प्रेस सचिव हेमंत खुटे ने दी है।


