
“जिले में उद्योगों के कथित अत्याचारों को देखकर इतिहास की पीड़ादायक यादें ताजा हो जाती हैं” – श्याम गुप्ता

रायगढ़।
रायगढ़ जिले में स्थापित विभिन्न उद्योगों और प्लांटों के प्रभाव को लेकर लगातार जनचिंताएं सामने आ रही हैं। स्थानीय नागरिकों द्वारा प्रदूषण, भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय क्षति तथा जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को लेकर समय-समय पर आवाज उठाई जाती रही है। इन्हीं परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रेस रिपोर्टर क्लब के स्टेट सेक्रेटरी श्याम गुप्ता ने कहा कि जिले में कुछ स्थानों पर उद्योगों का बढ़ता प्रभाव और आम जनता की समस्याएं देखकर मानवाधिकारों के संरक्षण तथा प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
श्याम गुप्ता ने कहा कि जब आम नागरिक अपने अधिकारों, स्वास्थ्य और आजीविका को लेकर संघर्ष करने के लिए विवश दिखाई देते हैं तथा उनकी शिकायतों का समयबद्ध समाधान नहीं हो पाता, तब यह स्थिति चिंताजनक बन जाती है। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसी परिस्थितियां देखकर यह विचार मन में आता है कि यदि वर्तमान समय में जनता को इतनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, तो इतिहास में विदेशी शासनकाल के दौरान लोगों ने कितनी पीड़ा और अत्याचार सहे होंगे।
उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि विकास और औद्योगीकरण के साथ-साथ नागरिकों के अधिकारों, पर्यावरणीय संतुलन तथा सामाजिक न्याय का भी समान रूप से संरक्षण हो। यदि विकास की कीमत आम जनता को अपने स्वास्थ्य, पर्यावरण और सम्मानजनक जीवन से चुकानी पड़े, तो यह चिंता का विषय है।
श्याम गुप्ता ने शासन-प्रशासन से मांग की कि उद्योगों से प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए, पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए तथा प्रभावित नागरिकों की शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब उसका लाभ आम जनता तक पहुंचे और उनके अधिकार सुरक्षित रहें।
“विकास वही, जो जनता के अधिकारों और सम्मान के साथ हो।”
“उद्योग बढ़ें, लेकिन इंसान और पर्यावरण की कीमत पर नहीं।”


