
“अघोर कोई पंथ नहीं पथ है।”
मानवता व आदर्श चरित्र के निर्माण का आध्यात्मिक शक्ति पीठ है आश्रम बनोरा।
बनोरा अर्थात बनो राम का पर्याय व आस्था का पवित्र अघोर धाम।


रायगढ़/ 30वांस्थापनादिवस
परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी के प्रिय शिष्य परम पूज्य संत शिरोमणि श्री प्रियदर्शी राम जी (पूज्य गुरुदेव जी) ने 31 जुलाई 1993 को मानव कल्याण हेतु अघोर गुरूपीठ #ब्रह्मनिष्ठालय बनोरा, रायगढ़ की #स्थापना की थी। विगत वर्षों में संस्थान ने अनवरत अनेकों मानव कल्याणार्थ कार्यक्रम चलाए हैं जो उनके उद्देश्यों को दर्शाता है।
साधु ,संतो ,ऋषि मुनियों की तपस्या,साधना,श्रम व आश्रय स्थली को आश्रम कहा जाता है। यहां की हर वस्तु सीखने सिखाने के योग्य होती है। पेड़ पौधे , कण कण, तपस्या ,योग,साधना व श्रम से सब पूज्यनीय हो जाते हैं। यहीं से वेद, पुराण, उपनिषद् ,शास्त्र आदि जन्म लिए । समाज और जीवन जीने की आदर्श शैली ,मानव सभ्यता का मंत्र मानव ने यहीं से सीखा।
शिक्षा के क्षेत्र में भी श्री अघोरेश्वर विद्या मंदिर की आदर्श एवं सर्व संसाधनों सुविधाओं से युक्त व्यवस्था कर विद्यार्थियों को उत्तम ,संस्कारयुक्त उच्च आदर्श शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।विद्यार्थी अच्छे नंबरों और प्रवीणता सूची से उत्तीर्ण हो कर समाज का नाम रोशन कर रहे हैं। यह सब परम पूज्य श्री गुरुदेव जी की घोर तपस्या,अघोर साधना के प्रति असीम जन आस्था ,विश्वास और श्रद्धा का अनुपम प्रतिफल है जो केवल अघोरेश्वर महाप्रभु की अहैतुक कृपा से संभव है


