
जो समाज की गंदगी को साफ करने का महान कार्य करता हो उनके तकलीफ को शासन प्रशासन ध्यान दे


रायगढ़ /आज चर्चा है डोर टू डोर कचड़ा उठाने महान कार्य करने वाली स्वच्छता दीदियों का हमारा सँविधान कहता है समान काम हेतु समान वेतन देने बिना भेदभाव के दिया जाना है पर प्लेसमेंट एजेंसी से भी अधिक मेहनत का काम करने के बावजूद भी इन्हें उचित पारिश्रमिक नहीं मिल पाता जो सीधा सीधा मानवाधिकार के खुला उलंघन है जबकि कलेक्टेड रेट अनुसार भी 350 लगभग है जो प्लेसमेंट एजेंसी कर्मचारियों को मिलता है जिसमें उन्हें मेडिकल अन्य सुविधाएं प्राप्त है परंतु नगर निगम स्वच्छता दीदियों के जो समाज की गंदगी को साफ करने में इनके भी भूमिका महत्वपूर्ण है जिनके महान सेवा कार्य को देखते हुए सौतेला व्यवहार सही नहीं इतने कम वेतन पर काम करना बहुत तकलीफ है उसके बावजूद समय पर वही वेतन के न मिलना भी दुःखद हैं जिसके दुष्प्रभाव भी हम मीडिया के माध्यम से देखते हैं उन्हें समय पर वेतन न मिलने पर स्वच्छता दीदी द्वारा जहर सेवन कर लेना उनके गरीबी दिनचर्या को बयान करती है जिसे शासन प्रशासन को गौर करने वाली बात है साथ ही साथ नगर निगम में व्यवहार तौर पर भी गिरता स्तर को देखे तो इन स्वच्छता दीदीयो द्वारा जो सुखा कचड़ा जिसमें लोहा प्लास्टिक अन्य सामान जो कचड़े से कलेक्शन को बेचने का अधिकार है उनके कम मानदेय में एक संजीवनी बूटी का काम करता था उस अधिकार को छीनकर खुद कबाड़ बेचकर दो महीने में उन्हें लॉलीपॉप पकड़ा दिया जा रहा जिस स्वच्छता कचड़ा समान रिक्शे की वजनी कचड़ा कबाड़ सामानों की वजन को देखते हुए भ्र्ष्टाचार साफ तौर पर दिख जाएगा जो चिंतनीय विषय जिसमे सुधार की जरूरत है सर्व समाज गौर करें पूरा सिस्टम इनके तकलीफ को देखते हुए इनके महान कार्य के आधार पर इन्हें प्रोत्साहित कर वेतन वृद्धि के साथ साथ इन्हें हर वो सुविधा प्राप्त हो जो नियम संविधान के दायरे में आता है श्याम गुप्ता की कलम से


