
गौमाता के मानव जीवन के जन्म से लेकर मृत्यु संस्कार तक है विशेष महत्व

एक्सीडेंट से मारने वाले जिम्मेदार लोग गौ हत्या के पाप से कैसे उभरोगे
रायगढ़ /.एक तरफ अशंख्या गौ हत्या सिर्फ भक्षण के लिए दूसरी तरफ अनगिनत गौमाता के एक्सीडेंट से मरने वाले एवं एक्सीडेंट से घायल होकर विकलांग होने वाले गाय बैल के दर्द को देश के संविधान कानून ने क्या जगह नहीं दिया है एक तरफ जंगली सूअर को कानूनी संरक्षण प्राप्त धन्य हैं अपने स्वार्थ के आधार पर कानुन बनाने वाले लोग दूसरे तरफ अनगिनत गाय बैलों का एक्सीडेंट से जिम्मेदार लोगों को शर्म क्यूँ नहीं आ रहा जो गौमाता के हमारे सनातन धर्म संस्कृति में जीने से लेकर मृत्यु तक के धार्मिक वैज्ञानिक मानव जीवन में काम आने वाले महत्व है जिसके लिए ही उन्हें गौमाता का स्थान भारतीय सनातन धर्म संस्कृति ने दिया है जिसे धीरे धीरे मुगलों अंग्रेजों के गुलामों ने भारतीय संस्कृति धर्मनिरपेक्ष संस्कृति के इज्जत किये बगैर खुलकर हमारी गौमाता के मांस भक्षण कर रहे हैं जिसके कारण देश के अंदर गौमाता को लाख विरोध करने के बाद भी काटा जा रहा जो कि धीरे धीरे भारतीय पवित्र संस्कृति को बर्बाद करने के ये ही पाट है जिसके विरोध लगातार होनी चाहिये साथ ही रोड में चल रहे अशंख्या बड़ी बाड़ी ट्रांसपोर्ट ट्रेलर की वजह अनगिनत गौमाता एक्सीडेंट से मारे जा रहे है जिसके संरक्षण के शासन प्रशासन द्वारा सिर्फ डायलॉग हो रहे जितने काम गायों के संरक्षण होनी चाहिए बिल्कुल नहीं हो रही हैं न ही 10 % की भी एक्सीडेंट में कमियां नहीं आयी है न ही गाय तस्करी में ना शासन न ही प्रशासन न ही आज के स्वार्थी गाय बैलों के मालिक जो उन्हें रॉड पर मरने के लिए मजबूर कर रहे हैं इसके जिम्मेदार लोगों के जीवन में हमेशा परेशानी तकलीफ रहेंगी घायल गौमाता के दर्द के आह से कोई नहीं बचेगा जो इनके तकलीफ के जिम्मेदार हैं भारतीय महान संस्कृति सभ्यता ने दुनिया को हमेशा रास्ता बताया पर भारतीय समाज के जिम्मेदार लोगों के आँखों में अपने स्वार्थ के चश्मे के कारण उन्हें कुछ भी पाप दिखाई नहीं दे रहा है ।


