

रायगढ़ / विगत 14 सितंबर को भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री और विश्व के नेतृत्व करता आदरणीय नरेंद्र मोदी जी का आगमन हुआ ! जिसकी तैयारी के लिए कार्यकर्ता गण अपना दिन रात रात एक करते रहे और उनकी मेहनत रंग भी लाई, जिसके परिणाम स्वरूप मोदी की सभा को 500000 लोगों की सौगात मिली ! किंतु दुर्भाग्य की बात है की व्यवस्था का संचालन प्रशासन का या पार्टी नेताओं का जिसका भी था बहुत ही निम्न स्तर का व्यवस्था किया गया था i लगभग दो से ढाई लाख लोग सभा स्थल में पहुंचे बगैर ही पुलिस प्रशासन के द्वारा वापस भेज दिया गया ! विश्व के सबसे बड़े नेता का सभा होना था जिसके लिए चाहिए था की कम से कम 2 किलोमीटर की परिधि में डीजे बॉक्स या चोगा लगाया जाता, साथ ही बड़े-बड़े स्क्रीन लगाए जाते जिससे जिन व्यक्तियों के नसीब में सीधे मोदी जी को देखना नहीं लिखा था कम से कम स्क्रीन पर देखकर मन को तसल्ली कर लेते! किंतु प्रशासन या बड़े नेताओं को कार्यकर्ताओं से क्या लेना देना! कुछ पुलिस वाले आक्रामक मुद्रा में दिखे उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वह कांग्रेस पार्टी के सच्चे नुमाइंदे हो क्योंकि उनकी करनी ऐसी थी जो भीड़ को पूरे बदतमीजी से खदेड़ रहे थे और पार्टी के नेता शायद अपने-अपने विधानसभा के टिकट के जुगाड़ में लगे थे उन्हें भी यह होश नहीं कि जिन कार्यकर्ताओं को कई दिनों से बैठक कर भीड़ जुटान के लिए उकसाया गया है एक बार उनकी भी शुद्ध ले ली जाए! मानो ऐसा लग रहा था जैसे मोदी जी कंफर्म टिकट लेकर सारे नेताओं को सौगात देने पहुंचे हैं ! कुछ हास्यास्पद बातें भी देखने को मिली कि उनमें से कुछ नेता जिन्हें पहले ही एहसास हो गया कि उनके नाम का टिकट मोदी जी अपनी जेब में नहीं रखे हैं वह अपनी गाड़ी से मोदी जी के उद्बोधन से पहले ही वहां से निकल लिए, और सभा के आधार कहे जाने वाले कार्यकर्ता जिन्हें सभा स्थल में जाने का मौका नहीं मिला अप शब्द कहते हुए बड़े बे आबरू होकर लौटते हुए नजर आए !
खैर जो भी हो मोदी जी आए और सभा करके चले गए लेकिन कार्यकर्ताओं के दिलों दिमाग में यह अपमान वर्षों तक एक टीस की तरह अपना दर्द देती रहेगी !


