
##राजनीति किराने की दुकान हो गई ## रायगढ़/ छत्तीसगढ़ में चुनाव कि घोषणा होते ही सभी राजनीतिक दल एवं राजनेता राजनीतिक खेती में मशगूल हैं कई राष्ट्रीय पार्टी के उम्मीदवार तो कुछ क्षेत्रीय पार्टियों से और जिन्हें दोनों पार्टी से टिकट नहीं मिला वो निर्दलीय उम्मीदवार बनकर चुनाव लड़कर समीकरण बिगड़ना चाहते हैं जिस तरह आज के समय में शहर के गली में गांवों सभी चौक चौराहे हर तीन या चार घर के बाद के बाद एक किराना दुकान रहता है और दुकान में कुरकुरे आलु चिप्स पजांबी भेल ऐसे चीजों को सजा कर रखते हैं मानो खुब बड़े सब समान मिलने वाली दुकान हैं उस आदमी से देखकर अंदाजा लगाता है यहां रोजमर्रा के सारे सामान मिलते होंगे पर पास आने पर 0/0 है फिर आदमी खिसया सा जाता है। आज राजनीति में नेता उसी किराने की दुकानों की तरह भरमार है । नेता के साथ कंधा से कंधा मिलाकर चलने वाले कार्यकर्ता कम नेता के सिर और छाती में चढ़कर छलांग लगाने वाले ज्यादा नजर आते हैं ।जिनका कोई विज़न नहीं है नाही सामाजिक कामों में कोई रुचि नहीं है पर बड़े स्टार् नेता बने फिरते हैं आओ देखें किसमें कितना है दम ईमानदार राजनीति की राह कितना मुश्किल है और चलना कितना मस्क़त ये फेसबुक वाट्सएप ट्विटर फ़ोटो खिंचवा नेता वाले ज्यादातर नेता और कार्यकर्ता महान राजनीतिक खिलाड़ियों में दम देखना बाकी है। पिक्चर अभी बाकी है... आई सी न्यूज हिमांशू चौहान के कलम से जनहित में जारी है।



